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अखिल भारतीय वैदिक शोध संगोष्ठी

स्वामी समर्पणानन्द वैदिक शोध संस्थान, गुरूकुल प्रभात आश्रम के अन्तर्गत ‘‘ वेदानुशीलन का अतीत और अनागत ’’ विषय पर दिनांक 13 जनवरी 2016 वेदों के मूर्धन्य विद्वान पूज्य स्वामी समर्पणानन्द सरस्वती जी ( पं0 बुद्धदेव विद्यालंकार) की पुण्य स्मृति पर अखिल भारतीया वैदिक शोध संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। विद्वज्जनों से निवेदन है कि अग्रलिखित बिन्दुओं पर शोधलेख Walkman-Chanakya-901 फोन्ट में टंिकत कर pavamani86@gmail.com पर मेल करें। सभी उत्कुष्ट लेख  ISSN 2229-6328 पावमानी मूल्यांकिता त्रैमासिकी शोध-पत्रिका में प्रकाशित किये जायेगें।
1. वेदपाठियों की परम्परा
2. वेदार्थ विचार के आरम्भिक प्रयत्न
3. पदपाठ प्रक्रिया की वेद व्याख्या में आवश्यकता
4. ब्राह्मण ग्रन्थों में रूप समृद्धि
5. ब्राह्मण ग्रन्थों में वेद व्याख्या की परम्परा और प्रवृत्तियां
6. वैदिक व्याख्या में निघण्टु और निरूक्तकारों का योगदान
7. वैदिक व्याख्या में प्रातिशाख्य की उपयोगिता
8. वैदिकव्याख्या में व्याकरण की उपयोगिता
9. वैदिकव्याख्या में स्वर की उपयोगिता
10. वैदिकव्याख्या में ऋषि, देवता एवं छन्द की उपयोगिता
11. श्रौत एवं गृह्य कर्मकाण्ड में विनियुक्त मन्त्रों की व्याख्या
12. मध्ययुगीन वेद व्याख्याकार
13. आधुनिक भारतीय वेद व्याख्याकार महर्षि दयानन्द, पं0 सातवलेकर, योगी अरविन्द
14. महर्षि दयानन्दानुवर्ती अन्य भाष्यकार
15. पाश्चात्य वेद व्याख्याकारों का सामथ्र्य एवं सीमाएं
16. वैज्ञानिक दृष्टि से वेद मन्त्रों की व्याख्यायें
17. युगीन समस्याओं के सन्दर्भ में वेद व्याख्याओं की आवश्यकता
18. वेदों के विविध वैज्ञानिक अर्थ